Tag: Judicial

भारतीय न्यायपालिका और हम

जिंदगी मे उतार चढ़ाव का मौसम तो चलता रहता है,
कभी हम खुद से खुद के लिए लड़ते हैं , कभी खुद के लिए औरों से |
कभी देश मे पानी की एक बूंद के लिए सूखे की मार होती है
तो कभी पानी की अधिक बहाव के कारण बाढ़ की त्रासदी |

कभी कभी यूहीं ना जाने हम कितने विजलित हो जाते हैं जब यह सुनते हैं की किसी को 20 साल जेल में रहना पड़ा , बिना जुर्म के, क्यूंकी केस की तारीख पर तारीख बढ़ती गयी और समय लग गया फैसला आते-आते |
जरा सोचिए उस माँ पर क्या गुज़रती होगा जिसका पति जेल चला जाए बिना जुर्म के और घर मे छोटे छोटे 3-4 बच्चे ? बिना किसी के सहारे का , ना जाने कैसे वो सबका पालन पोषण करती है |
ऐसे ऐसे एक दो नही हजारो उदाहरण पड़े हैं हमारे देश मे जिसकी आवाज़ तो है परंतु शायद वो मौन रहना ही पसंद करते हैं और यही सही भी है |
इस परस्थिति मे हम जब ऐसे मामलो को सुनते हैं तब ना जाने भारतीय न्यायपालिका को क्या-क्या बुरा-भला सुना जाते हैं |

हम युवा 8-9 घंटे काम करते हैं , तो कंपनी को न जाने कितने कुछ सुना देते है , जो की जायज है अगर हमारे काम की उचित महत्व अथवा मूल्य न मिले|
उस जज के बारे मे हम नही सोचते हैं जो 8-9 नही पूरे 18 घंटा काम करते हैं और वो अपनी कुछ दिन की छूटियों मे भी cases की फ़ाइल साथ मे रखते हैं , वो किसे सुनाये बुरा भला ? देश को ही ना जिसके लिए वो काम करते हैं ?

इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगी एक देश के लिए जहां के उच्चतम न्यायालय का प्रधान न्यायधीश रो पड़े अपनी व्यथा सुनाते सुनाते , जजों की स्ट्रेन्थ बढ़ाने के लिए, वो भी प्रधान-मंत्री के सामने|
हम विश्व शक्ति बनने की चाह रखते हैं पर शायद यह भूल जाते हैं की शक्ति सिर्फ इकनॉमिक डेव्लपमेंट से ही नही आती है , हरेक नागरिक को सही समय पर न्याय मिल जाए वो भी शायद इसका एक हिस्सा है | India मे टोटल 3 करोड़ केसेस पेंडिंग है | यह कहना कतई गलत नही होगा की जुडीसीयरी ने हमें मजबूर नही किया है बल्कि हमने जुडीसीयरी को मजबूर किया है |

विडियो लिंक :